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"विश्नू पुराण" मे एक महामूर्खतापूर्ण काल्प्निक चुदक्कड़ घटना का वर्णन है . एक समय इस विश्व मे एक राक्षस रहता था जिसका नाम "हिरण्याक्ष " था . . . . .पूरे हिंद महासागर(indian ocean) पर उसका ही राज था . . .वह दुष्ट राक्षस विश्नू से अत्याधिक शत्रुता रखता था और हमेशा उनके कार्य मे बाधा डालता था . . .मगर विश्नू ने हमेशा उसको श्रमा किया . . . . एक बार उस राक्षस के दुष्ट मस्तिष्क मे एक घिनौना विचार आया और उसने अपने सारे राक्षस सेना की समुद्र के भीतर अपने महल मे बैठक बुलाई . . . . और इन राक्षशों ने पृथ्वी को चुरा कर समुद्र मे छिपाने की चाल रची . . . . इस दुष्ट राक्षस हिरण्याक्ष ने आधी रात को चोरी चुपके से पृथ्वी को चुरा कर समुद्र(indian ocean) मे गहराई मे छिपा दिया . . . . जब सुबह हुई तो पृथ्वी को गायब देख कर पूरे देवलोक मे हाहाकार हो उठा . . . . . हर देवताओं ने इस गंभीर रहस्य पर चर्चा करने हेतु देवी देवताओं की बैठक बुलाई . . . मगर इस मुद्दे का हल नही निकल पाया . अंत मे सारे देवी देवता विश्नू के समक्ष इस मुद्दे को लेकर गये . . . विश्नू ने अपने दिव्य दृष्टि से सब कुछ जान लिया . . . और शीघ्र "वराहा"(सूवर) रूप धारण किया और समुद्र के भीतर घुस कर 1 लाख वर्ष तक अकेले उन राक्षशों से युद्ध किया अत: दुष्ट हिरण्याक्ष का वध किया . . .और पृथ्वी को समुद्र से बाहर निकाला और वापस शेष नाग के फन पर स्थापित कर दिया . . .
वैसे तो ये सभी भविष्य पुराण काल्पनिक है फिर भी इस कड़वे सच हजम ना करने वालो को मैं थोडा उजागर करू शायद अब तो बुद्धि आ जाये अब देखीये..
स्वयाभू भूदेवताओ द्वारा रचित ग्रंथो के अनुसार जब हिरण्याक्ष नामक राक्षस
पृथ्वी को बलपूर्वक घसीटकर समुद्र के नीचे
चुरा ले गया, तब विष्णु ने पृथ्वी की रक्षा हेतु वराह अवतार धारण किया। वराह और
हिरण्याक्ष के बीच 1 लाख वर्ष तक यूध्द चला, फिर वराह ने राक्षस को मार डाला और पृथ्वी को अपने बाहर निकले दाँतो पर उठाकर जल से बाहर ले आए।
मित्रो चित्र के माध्यम से आप इस कथा को समझ सकते है, कि किस तरह
भगवान विष्णू सुअर के अवतार मे प्रथ्वी को समुद्र मे डुबने से बचा रहे है।
वो क्या है कि मै कभी प्रथ्वी के बाहर गया नही ना इसलिये मेरी जानकारी मे सिर्फ यही बात है कि समुद्र सिर्फ प्रथ्वी पर हि है,
तो फिर ये भगवान विष्णू प्रथ्वी को कौन से समुद्र मे डुबने से बचा रहे है?
विज्ञान के मुतबीक पाणी सिर्फ एक ही ग्रह पर है और वो ग्रह है पृथ्वी..
तो फिर समुद्र ही पृथ्वी पर है तो फिर पृथ्वी को ही समुद्र मे कैसे डुबाया जा सकता है चलो मान भी लिया के वराह अवतार मे विष्णु ने पृथ्वी को डूबने से बचा लिया और पृथ्वी को समुद्र से बहार निकाला लेकिन जरा तर्क लगा कर आप ही सोचीये की ऐसा कोनसा इतना बड़ा समुद्र है जिसमे इतनी विशालकाय पृथ्वी डूब गई..??
सोचीये इतना बडा समुद्र जिसके आगे इतनी विशालकाय प्रथ्वी इक छोटी सी गेंद के समान दिख रही है?
इतनी बड़ी ये पृथ्वी जो भगवान विष्णु के मुह के बराबर है तो सोचीये खुद भगवान् विष्णु कितनी बड़े होंगे अरे भगावन विष्णु ही क्या वो ग्रह ही कितना बड़ा होगा जसपर इतना बड़ा समुद्र और पुथ्वी एक छोटीसी गेंद की तरह दिख रही हो...???
अरेरेरे बापरे सिर्फ सोच कर ही मेरा दिमाग फट जाता है कितना चुतीया बना दिया ब्राम्हणो ने हमको फिर भी हम अंधभक्त थोड़ी भी तर्क लगाने की सोचने से डर जाते है क्यों हम इस कड़वे सच को अंदेखा करते है..?? ऐसी हजारो पोल खुलती है इन काल्पनीक भविष्य पुराणों में
इतनी पोल तो रजनीकांत की फिल्मो मे भी नही होती जितने इन ग्रण्थो मे है।
शायद यही वजह है कि ब्राह्मणो ने विष्णू के वराह अवतार की पुजा शुरु नही करवाई शायद वो लेग समझ गये थे कि ये बात
तो किसी अनपड़ से भी हजम नही होगी..
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By-अंधविश्वस की कैद रिटर्न
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