Tuesday, 20 September 2016

बेवडा भगवान

Brahmin Launched Brand New Drunken Shiva( Lol )

ये हैं एक नये नवेले भगवान इनका नाम है “बेवडा भगवान ” ये अभी कुछ वर्षों पूर्व से बज़ारों मे उतारे गये हैं . . . ब्राह्मण लोग अभी इसका प्रचार ज़ोर शोर से कर रहे हैं , ताकि अन्ध्भक्तों तक एक नया भगवान पाहुंचा कर दौलत बटोरा जा सके जो के प्राचीन काल से प्रचलित है , चलिये इनकी कथा हम धर्म ग्रंथ से जाने का प्रयत्न करते हैं . . . . .

अन्ध्भक्ति की उच्च्तम ग्रंथ शिव पुराण मे लिखा है के . . . . . .
एक बार भोलेनाथ जी ने जम कर भांग दारू पिया , वो इतने नशे मे धुत्त थे के उन्हें कुछ समझ नही आराहा था . . . . . . . .उसी समय एक बदसूरत नारी जिसका ना ठ्रुभा था वो भोलेनाथ के समक्ष प्रकट होती है जब भोलेनाथ उनके मुख को देखते हैं तो उनको चक्कर आ जाते हैं और उल्टी(vomitting) करना चालू कर देते हैं , वो उल्टी नीचे गिरती है जो के पूरे विश्व को छोड कर केवल भारत मे ही ऋषि मुनी के यग्य हवन मे गिरता है , परिणाम स्वरूप इस बेवडे भगवान का जन्म होता है . . . . . . . .

तो बोलो जय अन्ध्भक्ति

Sunday, 18 September 2016

Andh bhaqti

मित्रो आज का हमारा यह पोस्ट पूरा पढ़ीये
और पोस्ट पसंद आये तो ज्यादा से
ज्यादा शेयर करीये,
मित्रों आपका साथ ही मेरा उत्चाह है....

"विश्नू पुराण" मे एक महामूर्खतापूर्ण काल्प्निक चुदक्कड़ घटना का वर्णन है . एक समय इस विश्व मे एक राक्षस रहता था जिसका नाम "हिरण्याक्ष " था . . . . .पूरे हिंद महासागर(indian ocean) पर उसका ही राज था . . .वह दुष्ट राक्षस विश्नू से अत्याधिक शत्रुता रखता था और हमेशा उनके कार्य मे बाधा डालता था . . .मगर विश्नू ने हमेशा उसको श्रमा किया . . . . एक बार उस राक्षस के दुष्ट मस्तिष्क मे एक घिनौना विचार आया और उसने अपने सारे राक्षस सेना की समुद्र के भीतर अपने महल मे बैठक बुलाई . . . .  और इन राक्षशों ने पृथ्वी को चुरा कर समुद्र मे छिपाने की चाल रची . . . .  इस दुष्ट राक्षस हिरण्याक्ष ने आधी रात को चोरी चुपके से पृथ्वी को चुरा कर समुद्र(indian ocean) मे गहराई मे छिपा दिया . . . . जब सुबह हुई तो पृथ्वी को गायब देख कर पूरे देवलोक मे हाहाकार हो उठा . . . . . हर देवताओं ने इस गंभीर रहस्य पर चर्चा करने हेतु देवी देवताओं की बैठक बुलाई . . .  मगर इस मुद्दे का हल नही निकल पाया .  अंत मे सारे देवी देवता विश्नू के समक्ष इस मुद्दे को लेकर गये . . .  विश्नू ने अपने दिव्य दृष्टि से सब कुछ जान लिया . . . और शीघ्र "वराहा"(सूवर) रूप धारण किया और समुद्र के भीतर घुस कर 1 लाख वर्ष तक अकेले उन राक्षशों से युद्ध किया अत: दुष्ट हिरण्याक्ष का वध किया . . .और पृथ्वी को समुद्र से बाहर निकाला और वापस शेष नाग के फन पर स्थापित कर दिया . . .

वैसे तो ये सभी भविष्य पुराण काल्पनिक है फिर भी इस कड़वे सच हजम ना करने वालो को मैं थोडा उजागर करू शायद अब तो बुद्धि आ जाये अब देखीये..
स्वयाभू भूदेवताओ द्वारा रचित ग्रंथो के अनुसार जब हिरण्याक्ष नामक राक्षस
पृथ्वी को बलपूर्वक घसीटकर समुद्र के नीचे
चुरा ले गया, तब विष्णु ने पृथ्वी की रक्षा हेतु वराह अवतार धारण किया। वराह और
हिरण्याक्ष के बीच 1 लाख  वर्ष तक यूध्द चला, फिर वराह ने राक्षस को मार डाला और पृथ्वी को अपने बाहर निकले दाँतो पर उठाकर जल से बाहर ले आए।
मित्रो चित्र के माध्यम से आप इस कथा को समझ सकते है, कि किस तरह
भगवान विष्णू सुअर के अवतार मे प्रथ्वी को समुद्र मे डुबने से बचा रहे है।
वो क्या है कि मै कभी प्रथ्वी के बाहर गया नही ना इसलिये मेरी जानकारी मे सिर्फ यही बात है कि समुद्र सिर्फ प्रथ्वी पर हि है,
तो फिर ये भगवान विष्णू प्रथ्वी को कौन से समुद्र मे डुबने से बचा रहे है?
विज्ञान के मुतबीक पाणी सिर्फ एक ही ग्रह पर है और वो ग्रह है पृथ्वी..
तो फिर समुद्र ही पृथ्वी पर है तो फिर पृथ्वी को ही समुद्र मे कैसे डुबाया जा सकता है चलो मान भी लिया के वराह अवतार मे विष्णु ने पृथ्वी को डूबने से बचा लिया और पृथ्वी को समुद्र से बहार निकाला लेकिन जरा तर्क लगा कर आप ही सोचीये की ऐसा कोनसा इतना बड़ा समुद्र है जिसमे इतनी विशालकाय पृथ्वी डूब गई..??
सोचीये इतना बडा समुद्र जिसके आगे इतनी विशालकाय प्रथ्वी इक छोटी सी गेंद के समान दिख रही है?
इतनी बड़ी ये पृथ्वी जो भगवान विष्णु के मुह के बराबर है तो सोचीये खुद भगवान् विष्णु कितनी बड़े होंगे अरे भगावन विष्णु ही क्या वो ग्रह ही कितना बड़ा होगा जसपर इतना बड़ा समुद्र और पुथ्वी एक छोटीसी गेंद की तरह दिख रही हो...???

अरेरेरे बापरे सिर्फ सोच कर ही मेरा दिमाग फट जाता है कितना चुतीया बना दिया ब्राम्हणो ने हमको फिर भी हम अंधभक्त थोड़ी भी तर्क लगाने की सोचने से डर जाते है क्यों हम इस कड़वे सच को अंदेखा करते है..?? ऐसी हजारो पोल खुलती है इन काल्पनीक भविष्य पुराणों में
इतनी पोल तो रजनीकांत की फिल्मो मे भी नही होती जितने इन ग्रण्थो मे है।
शायद यही वजह है कि ब्राह्मणो ने विष्णू के वराह अवतार की पुजा शुरु नही करवाई शायद वो लेग समझ गये थे कि ये बात
तो किसी अनपड़ से भी हजम नही होगी..

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By-अंधविश्वस की कैद रिटर्न

Friday, 16 September 2016

आबे ज़मजम क्या ह

💭💭आबे ज़मजम क्या है?💭💭

जमजम 18 x 14 फुट और 13 मीटर गहरा कुंआ है

जो 4000 साल पहेले शुरू हुआ

उस दिन से आजतक ये कभी भी सूखा नहीं

उस दिन से आज तक इस पानी का जाएका कभी बदला नहीं

कोई हरियाली या पेड़, पौधे इस कुएं में नहीं उगते

इस लिए ये पानी कभी मैला नहीं होता ना इस से कोई बीमारी होती है

यूरोप के बड़े बड़े लैब ने इस पानी का मुआयना किया और इस पानी को पीने के लिए सही बताया

ये छोटा कुंआ लगभग 2 करोड़ लोगो को पानी पिलाता है

इस कुएं में ऐसी मोटरें लगाई गयी है जो हर सेकंड 8000 लीटर पानी खींचती है

और ये दिन के 24 घंटे चलता रहता है

ये इस कुएं की शान है की ये कुंआ वापस सिर्फ 11 मिनिट में फिर से भर जाता है।
इस लिए इसके पानी का लेवल कभी कम नहीं होता

सुबहान अल्लाह

ये बात रुकनी नही चाहिए सभी दोस्तों को शेयर करे।
अल्लाह हमे नेक काम करने की तौफीक दे।
अामीन

Raat ko sone se pahele ye padhe taaki aap ki raat ibadat me guzre aur aap ke gunah kam ho
  
3 Bar .Astagfar
3 Bar .Subhanallah
3 Bar .Durood-Pak
3 Bar .Pahela Kalma
3 Bar. Surh Ikhlas
*_ _ _ _ _ _*
1 Minute Tak Msg Sb Ko send Kro
1 Din Apko Ye 1 Minute Kaam Aaega...
इसलाम धर्म से बढ़कर और कोई धर्म नहीं
इसे आखिर तक पडे………
हुजुर पाक "सल्लाहो अलैही वसल्लम " ने फरमाया के ए अलि "रजि. ता. अल्हा" रात को रोजाना पांच काम करके सोया करो……………………|
1. 400 दिनार सदका देकर सोया करो……………………|
2. एक कुरआन पाक पड़कर सोया करो…………………|
3. जन्नत की कीमत देकर सोया करो……………………|
4. दो लड़ने वालो मे सुल्हे कराके सोया करो……………………|
5. एक हज करके सोया करो……………………|
…………………
हजरत अली रजि. ता. अल्हा. ने फरमाया के या रसुललला ये तो मेरे लिये बहुत मुश्किल हे !
तो हमारे आका ने फरमाया ??
…………………………………
1. ए अली चार मर्तबा सूरहे फातहा "अल्हम्दो शरीफ़" पढकर सोया करो | इसका सवाब 400 दिनार सदका देने के बराबर हे …|
2. तीन मर्तबा "कुल होव्ल्लाहो अहद" पढकर सोया करो | इसका सवाब कुरआन पड़ने के बराबर हे …|
3. दस मर्तबा "दुरुद शरीफ़" पढकर सोया करो | इसका सवाब जन्नत की किमत अदा करने के बराबर होगा…|
4. दस मर्तबा "तोबा अस्तयफ़ार" पढ कर सोया करो | इसका सवाब दो लड़ने वालो के दरमियान सुल्ह कराने के बराबर होगा…|
5. चार मर्तबा "तीसरा कलमा" पढकर सोया करो | इसका सवाब एक हज के बराबर होगा ……|
इस पर आप हजरत अली ने फरमाया ए मेरे आका ये अमल तो अब रोज रात को पढकर ही सोया करूँगा………
अल्लाह तआला हम सबको यह अमल रोज रात मे पढकर सोने की तोफिक अता फरमाये |
{आमीन-अल्लाहुम्मा-आमीन}
नमाज पढे इससे पहले की लोग आपकी नमाज पढ ले...
अगर ये msj पढकर कोई इस पर अमल करेगा तो उसका सवाब आप को मिलेगा
इसे अपने पास मत रखे बलके शयर करे
दुआ का तलबगार. ........                                
अल्लाह वो है जो व्हेल मछली🐋 को भी रोज़ाना समन्दर में 33 टन(यानी 36,960kg) गोश खिलाता है ।

सुभान अल्लाह ,तो फिर हम सिर्फ 2 रोटी🍪 के लिए इतना परेशान क्यों होते है ।

तो सिर्फ अल्लाह से मांगों जो देता ख़ुशी से और कहता नही किसी से।

जो रब से नही मांगता वो सब से मांगता है।

ऐ अल्लाह ये बात आगे पहुँचने वाले को कभी किसी का मोहताज ना करना ।
    
                                     अमीन......@

बकरीद,या "कुरबानी" पर एतराज क्यों?

बकरीद,या "कुरबानी" पर एतराज क्यों? !.........

एक मित्र ने सोशल मीडिया के माध्यम से कुरबानी पर एतराज करते हुए आमिर खान को संबोधित व्यंग भरा मेसेज भेजा है, वह लिखते है " डियर आमिर तुम कहां हो," पी के फिल्म में हिन्दू देवी देवताओं की मजाक उडाने वाले को कुरबानी मे जानवरों पर अत्याचार क्यों नजर नहीं आता,? बकरईद के मोके पर मीडिया के माध्यम से यह सूचना भी मिली थी कि सुप्रीम कोर्ट के सात जजों ने न्यायालय में रिट डाल कर कुरबानी पर प्रतिबंद लगाने की प्रार्थना की है,इस के अलावा भी समय समय पर देश मे बहुसंख्यकों का एक विशेष वर्ग कुरबानी को ले कर मुसलमानो को निर्दयी,अत्याचारी,और करूर साबित करता रहा है,और मुसलमानों को निशाना बनाते हुए वह कुरबानी पर पर्तिबन्ध लगाने की मांग कर ता आ रहा है,उच्चतम न्यायालय के जिन अधिवक्ताओं ने जानवरों पर अत्याचार की दुहाई देते हुए कुरबानी के दिन पशू हत्या पर रोक लगाने की मांग की है क्या वह बकताएंगे कि 365 दिन में एक विशेष  दिन (बकरीद का दिन)में उन की मांग को स्वीकार करते हुए अगर पशुहत्या पर प्रतिबन्ध लगा ही दिया जाए तो क्या एक दिन के प्रतीबन्द से देश या दुनिया से पशुहत्या का खात्मा होजाएगा, भारत में एक अन्दाजे के अनुसार प्रतिदिन दो लाख से अधिक( मुर्गा और मछली को छोड कर) पशुऔं की हत्या मीट खाने के लिए की जाती है,इस में मुसलमानों का हिस्सा बीस प्रतीशत से अधिक नही है, यकीन न आए तो आप अपने शहर या क्षेत्र में मीट की दुकानों एंव नॉन वेज होटलों का जायजा लें और देखें कि इस प्रकार की दुकानें या होटल्स मुसलमानों के अधिक हैं या गैर मुस्लिमों के, यह भी खयाल रहे कि मुसलमान झटके का मीट नही खाता इस लिए वह गैर मुसलिम होटल या मीट शॉप्स पर मीट खाने या खरीदने नही जाता जब कि मुस्लिम मीट शॉप और होटलो पर गैर मुस्लिम बडी संख्या में मीट खाने और खरीदने आता है ,मुर्गा ,बकरा,और मछली की मुस्लिम दुकानों के तो सत्तर प्रतीशत ग्राहक ही गैर मुस्लिम होते हैं,प्रश्न यह है कि पशुओं पर अत्याचार को रोकने के लिए एक बकरीद के दिन पशु हत्या पर प्रतीबन्द क्या मसले का हल है,  अगर बकरीद के दिन की कुरबानी ही इस की जिम्मेदार है तो क्या मुल्क भर में मोजूद गैर मुस्लिमों की मीट शापों पर बकरीद के दिन भी पशु हत्या नही होती,         सुअर पालन देश मे,एक बडा उद्योग हे उस की पेैदावार ही मीट प्राप्ती के लिए की जाती है,इस के अलावा वह कोई हल में नही चलता,एक मुसलमान उस को छू भी नही सकता वह केवल गैर मुस्लिमों की ही खूराक बनता है,उस की हत्या पर प्रतिबन्ध की बात कोई क्यों नही करता? जब कि उस की तो हत्या भी बहुत ही निर्मम तोर पर की जाती है,उस की गर्दन पर छुरी काम नही करती अत:उस की गर्दन के नीचे दोनों बाजुओं के बीच से उस के ह्रदय में छुरा घोंप कर उस की हत्या की जाती है, इसी के साथ वह हिन्दु मिथ्यालोजी मे विषणु का पर्थम अवतार भी है, फिर भी उस का ख्याल न तो किसी हिन्दु संस्था को आया और न किसी उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ता को,जिसका अर्थ यह है कि कुरबानी पर प्रतिबन्ध की मांग का आधार पशु प्यार नही है अपितु निशाने पर मुसलमान हैं,जिन्हें मुसलमानों से ही खुदा वासते का बैर है वह किसी न किसी बहाने से विरोध की जवाला जलाए रखना  चाहते हैं, पशुप्यार में कुरबानी पर प्रतिबन्ध की मांग करने वालों को क्या यह पता नहीं है कि मानव जगत की 98% आबादी मासाहारी है,और मांस व उस के अवशेषों से जुडी वस्तुओं का कारोबार भारत का एक शीर्ष उद्योग है जो 95% हिन्दुओं के हाथ में है,भारत के 21 बडे मीट पलान्टों में से 20 हिन्दुओं के हैं इस देश की सब से बडी मीट एक्सपोर्ट कम्पनी " अलकबीर" के चार शियर होल्डरों में सब के सब हिन्दू हैं,
     भारत में प्रती दिन दस लाख से अधिक मुर्गे काटे जाते हैं, मुर्गा पालन एक मेजर उद्योग है,उत्तरी भारत मे पंजाब उसकी बडी मंडी है जहां से यूपी, उत्राखण्ड, हरयाणा, दिल्ली, और हिमाचल तक मुर्गा सपलाई होता है ,यहां पर यह उद्योग पूर्णत: गैर मुस्लिमों के हाथ में है,अगर पशुमित्रों की बात मानते हुए पशुहत्या पर पर्तिबनध लगा दिया जाए तो कितने लोग बेरोजगार होंगे और देश के राज कोष मे आने वाले रिवेनयु पर जो असर पडेगा पशुमित्रों को उस का अनदाजा नही है,
       बात दर असल यह है कि हिन्दुवादी गिरोह कुरबानी की तुलना अपने यहां की जाने वाली " बली" से करता है जिसे वह छोडता जा रहा है, जब कि कुरबानी उस से एक दम इतर है, देवी देवताओं के चरनों में किसी पशू को काट कर केवल खूं बहाने से उस का कोई संबन्ध है और न ही वह पत्थर की मूर्ती पर व्यर्थ दूध बहाने जैसा है, स्वंय कुरआन में कहा गया है कि, न तो अल्लाह को खून पहुचता और न गोश्त,हां उसे तकवा पहुचता है, (सूरह हज आयत 37) तकवा क्या है? जिसके तहत कुरबानी की जाती है जो  एक अत्यन्त उपयोगी एंव लाभकारी कृत्य है,वह कैसे?  इस का वर्णन हम अपने अगले लेख मे करेगें साथ ही यह भी बताएगें कि पशु हत्या एक सवभाविक क्रिया है उस मे न तो किसी जीव को पीडा दी जाती और किसी पर जुल्म किया जाता, यह सब कैसे?  यह जान ने के लिए इन्तिजारकी जिए हमारी अगली पोस्ट का ..................................

इंडियन मीडिया और मुसलमान

इंडियन मीडिया और मुसलमान!!!******    

शाहबुद्दीन तो सिर्फ एक बहाना है असली मुद्दा तो मुस्लिमो से नफ़रत को देश में फैलाना है#####

पिछले कुछ दिनों से मीडिया शाहबुद्दीन की रिहाई को लेकर देश में ऐसा मौहल बना रही है कि देश के हिन्दुओ को लगे की शहाबुद्दीन कोई बहुत बड़ा आतंकवादी है और उसके रिहा होने से हिन्दुओ की जान को खतरा है।

जबकि  शाहबुद्दीन पर भी वही आरोप है जैसे उत्तर प्रदेश में राजा भैया, डी पी यादव, ब्रजभूषण सिंह, धनअंजय सिंह, हरी शंकर तिवारी, बिहार में सूरज भान, मुन्ना शुक्ला, अनंत सिंह, प्रभुनाथ सिंह, पप्पू यादव और भी कितने अपराधी नेताओं पे है। बल्कि इनमे से ज़्यादातर पे शाहबुद्दीन दे कही ज़्यादा गंभीर आरोप है और वो सभी पार्टीयो के सांसद और विधायक है। जब वो संगीन अपराध करते है और खुलेआम कानून का मज़ाक बनाते है तब मीडिया को उनमे सिर्फ एक अपराधी दिखता है लेकिन जब यही नाम कोई शाहबुद्दीन, मुख़्तार होता तो मीडिया उसे ऐसा बना कर पेश करती है जैसे वो दुनिया का बहुत बड़ा आतंकवादी है और देश में दूसरे धर्म के लोगो को ही उससे खतरा है। ताकि लोगो को बताया जा सके की सिर्फ मुस्लिम ही अपराध करता है बाकी धर्म के अपराधी तो मजबूरी में ऐसे है।
संघी मीडिया को मुस्लिम अपराधी की छोटी से छोटी बात तो बहुत बड़ी लगती है लेकिन जब अपराधी किसी और धर्म का हो (जैसे छोटा राजन जैसा खूंखार अपराधी जिसे मीडिया ने राष्टवादी डॉन कहा) तो मीडिया उसके मजबूरी में अपराधी बनने की कहानी बनाती है।

वही देश में मुसलमानो का नरसंघार करने वालो को मीडिया ने देश का हीरो बना कर पेश किया और राष्ट्रभक्ति का नाम देकर कितने ही आतंकवादियो को सत्ता के ऊंचे मुकाम तक पहुचाया।
मोदी की मंत्री माया कोडनानी ने बेक़सूर मुसलमानो को आग में जलवाया और बाबू बजरंगी तो मुस्लिम बच्चो को मार कर खुद को शिवाजी और महाराणा प्रताप जैसा समझ रहा था उन जैसे हज़ारो आतंकवादियो को बीजेपी और आरएसएस खुलकर समर्थन करते है और अदालतों में उन्हें पूरी सुविधा दिलाते है। तब ये मीडिया को क्या हो जाता है।अमित शाह को जब अदालत से तड़ीपार कर गुजरात से में नहीं घुसने का फरमान होता तब अदालत गलत हो जाती है और वही जब उन्ही अदालतों से अपने हिसाब फैसला दिला कर अपराधी को पार्टी का प्रमुख बना दिया जाता है तब इस पर मीडिया में उस पर कोई चर्चा नहीं होती।

मुज़फ्फरनगर में फर्जी विडियो दिखा कर दंगा करने वाले सोम, राणा, बालियान, साध्वी प्राची मीडिया की नज़र में राष्ट्रवादी है। बम ब्लास्ट के आरोपी साध्वी प्रज्ञा, कर्नल परोहित, स्वामी असीमानंद और संघ से जुड़े कितने ही लोग जो प्रधानमंत्री मोदी, ग्रहमंत्री राजनाथ जैसे बड़े नेताओं के करीबी है उनको मीडिया का समर्थन क्यों है।
शाहबुद्दीन के मामले को इतना जोरशोर से उठा कर ये भगवा मीडिया हरियाणा के इतने बड़े कांड को छुपा गया।

आज देश में सरकार की कोई भी नीति का विरोध करना देशद्रोह बन गया है और यह सब इसी संघी मीडिया की वजह से है। जो वही खबर दिखाता है जो नागपुर के इसके आकाओ की तरफ से कही जाती है।
आज देश की हालत ऐसी हो गई है कि जिस पे जुल्म होता है उसी को मीडिया अपराधी बना कर दिखाता है। चाहे दादरी के अख़लाक़ के परिवार के साथ मीडिया का बर्ताव हो या हरियाणा के मज़लूम परिवार के साथ या मुज़फ्फरनगर के दंगा पीड़ित लोगों के साथ इन सारे मामलों में मीडिया ने पीड़ित मुस्लिमो को ही गुनाहगार साबित करने की कोशिश की।

आतंकवाद के नाम पे फ़र्ज़ी मुकदमो में जब मुस्लिम लड़को को संघी खुफिया एजेंसी गिरफ्तार करती है तब यह न्यूज़ चैनल 24 घंटे झूठी कहानियां दिखा कर गिरफ्तार लोगों के परिवारों और पूरी मुस्लिम क़ौम पर आतंकवादी होने का ठप्पा लगाती है और जब इन्ही बेक़सूर लोगो के कई साल बर्बाद करके उन्हें जब बरी किया जाता है तब मीडिया में उस पर कोई चर्चा नहीं होती।

मीडिया का काम होता है किसी भी खबर को लोगो तक पहुचाना लेकिन देश के ज़्यादातर मीडिया घराने किसी ना किसी बड़े उधोगपतियों के है जो सरकार और संघ के इशारों पे समाज में नफरत फैला कर संघ के नफरत के एजेंडे को पूरा कर रहे है। जिससे देश में हिन्दु-मुस्लिम के बीच में दूरी बढ़ती रहे और 2014 के चुनाव की तरह 2019 में भी इनकी सरकार बने। मोदी ने देश से जो वादे किए थे वो तो भुला दिए है और महंगाई को भी नहीं रोक पाए है अब सिर्फ समाज में नफरत फैला कर ही चुनाव जीता जा सकता है जिसको यह दलाल और भांड मीडिया के माध्यम से अंजाम दे रहे है।

नोट:- मेरी पोस्ट शाहबुद्दीन या किसी और के सपोर्ट में नहीं है बल्कि मीडिया का असली चेहरा लोगो के सामने लाने की कोशिश है।जो मुस्लिमो का नाम आते ही भूखे भेड़िया की तरह उन पर टूट पड़ता है।بزم اردو فاروق ایوب

बकराईद 🐏🐐 सिर्फ खाने पीने🍛🍲🍹 का मसला नही हे 😋😋।

बकराईद 🐏🐐 सिर्फ खाने पीने🍛🍲🍹 का मसला नही हे 😋😋।
इसके साथ और भी कुछ बिंदु जुड़े हुए हे जो की राष्ट्रहित 🇮🇳 में उपयोगी हे।
जेसे
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ईद उल अजहा के मौके पे लाखो जानवरों की कुरबानी होती हे जिससे देश का 💴💵💷💶 खरबों रुपियों का चमड़े का व्यवसाय तरक्क़ी करता हे
उन्ही जानवरों की खालो से  मन्दिरों और मठो में श्रधा से बजाए जाने वाले ढोल से लगाकर सेनिको के वस्त्र एवं देश की रक्षा में काम आने वाले हथियारो के कवर घोड़ों 🐎 के ज़ीन बनाये जाते हें

जानवरों कि खाल से बन्ने वाली वस्तुएँ जिसे देश का  हर व्यक्ति उपयोग करता हे जेसे :- बेल्ट/पॉकेट /बटुआ /पर्स/कंपनी बेग, जेकेट, जूते, बाटा कि चप्पलें बनाई जाती हे जिसे हर व्यक्ति बड़े चाव से पेहेनता हे
जानवर कि हड्डी शक्कर बनाते समय उस को साफ करने के काम आती हे और उसके कई अंगो से केप्सुल 💊 के कवर बनाए जाते हे तभी केप्सुल 🇯🇵 नोन्वेज होता हे
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जानवर की आंते खाई नही जाती, उसकी आंतो से धागे बनाए जाते हे, उसी धागे द्वारा अस्पतालों में दुर्घटना में घायल लोगो के कटे फटे अंगो कों सिला जाता हे।
जब कोई ईद विरोधी, दुसरो के खानपान में नुक्ता चीनी करने वाला, जेविक असंतुलन से बेखबर व्यक्ति जब अस्पताल में दर्द से कराह रहा होता हे तब उसी धागो से उसकी चमड़ी सिली जाती हे और बाद में वही 🇯🇵केप्सुल 💊 दिया जाता हे  ।।।
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जानवर के गोश्त के तीन 3⃣ हिस्से किये जाते हे जिसमे से एक ☝हिस्सा उन मिलने वालो को दिया जाता हे जिनके घर ज़िबह का जानवर नही होता,एवं
एक☝ हिस्सा गरीबो यतीमो को दिया जाता हे जिससे उन्हें भरपूर प्रोटिन एवं ओमेगा 3 फेटी एसिड,आयरन,केल्सिलम इत्यादि तत्वों का पोषण मिलता हे।
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देश 🇮🇳 के लाखो ग्रामीण किसान
जिनमे ज्यादातर गरीब दलित वर्ग हे
जिनका खेती के साथ पशुपालन 🐐🐐🐐 का व्यवसाय हे
उन्हें ईद के मौके पर प्रत्येक जानवर के चार गुना अधिक पेसे मिलते हे
जिससे उनके पूरे साल की रोटी 🍪🍪🍪 का इन्तेज़ाम हो जाता हे।

बकरा ईद के मौके पर हज ✈✈ का सीजन होता हे जिससे एयर इंडिया एवं देश की निजी हज कम्पनियों को करोड़ों रुपियों का फायदा होता हे
कुल मिलाकर बकरा ईद पर्व
"राष्ट-हित"🇮🇳🇮🇳 में बहुत उपयोगी हे।
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अब आप गणेश चतुर्थी के फायदे बताइए ????