इंडियन मीडिया और मुसलमान!!!******
शाहबुद्दीन तो सिर्फ एक बहाना है असली मुद्दा तो मुस्लिमो से नफ़रत को देश में फैलाना है#####
पिछले कुछ दिनों से मीडिया शाहबुद्दीन की रिहाई को लेकर देश में ऐसा मौहल बना रही है कि देश के हिन्दुओ को लगे की शहाबुद्दीन कोई बहुत बड़ा आतंकवादी है और उसके रिहा होने से हिन्दुओ की जान को खतरा है।
जबकि शाहबुद्दीन पर भी वही आरोप है जैसे उत्तर प्रदेश में राजा भैया, डी पी यादव, ब्रजभूषण सिंह, धनअंजय सिंह, हरी शंकर तिवारी, बिहार में सूरज भान, मुन्ना शुक्ला, अनंत सिंह, प्रभुनाथ सिंह, पप्पू यादव और भी कितने अपराधी नेताओं पे है। बल्कि इनमे से ज़्यादातर पे शाहबुद्दीन दे कही ज़्यादा गंभीर आरोप है और वो सभी पार्टीयो के सांसद और विधायक है। जब वो संगीन अपराध करते है और खुलेआम कानून का मज़ाक बनाते है तब मीडिया को उनमे सिर्फ एक अपराधी दिखता है लेकिन जब यही नाम कोई शाहबुद्दीन, मुख़्तार होता तो मीडिया उसे ऐसा बना कर पेश करती है जैसे वो दुनिया का बहुत बड़ा आतंकवादी है और देश में दूसरे धर्म के लोगो को ही उससे खतरा है। ताकि लोगो को बताया जा सके की सिर्फ मुस्लिम ही अपराध करता है बाकी धर्म के अपराधी तो मजबूरी में ऐसे है।
संघी मीडिया को मुस्लिम अपराधी की छोटी से छोटी बात तो बहुत बड़ी लगती है लेकिन जब अपराधी किसी और धर्म का हो (जैसे छोटा राजन जैसा खूंखार अपराधी जिसे मीडिया ने राष्टवादी डॉन कहा) तो मीडिया उसके मजबूरी में अपराधी बनने की कहानी बनाती है।
वही देश में मुसलमानो का नरसंघार करने वालो को मीडिया ने देश का हीरो बना कर पेश किया और राष्ट्रभक्ति का नाम देकर कितने ही आतंकवादियो को सत्ता के ऊंचे मुकाम तक पहुचाया।
मोदी की मंत्री माया कोडनानी ने बेक़सूर मुसलमानो को आग में जलवाया और बाबू बजरंगी तो मुस्लिम बच्चो को मार कर खुद को शिवाजी और महाराणा प्रताप जैसा समझ रहा था उन जैसे हज़ारो आतंकवादियो को बीजेपी और आरएसएस खुलकर समर्थन करते है और अदालतों में उन्हें पूरी सुविधा दिलाते है। तब ये मीडिया को क्या हो जाता है।अमित शाह को जब अदालत से तड़ीपार कर गुजरात से में नहीं घुसने का फरमान होता तब अदालत गलत हो जाती है और वही जब उन्ही अदालतों से अपने हिसाब फैसला दिला कर अपराधी को पार्टी का प्रमुख बना दिया जाता है तब इस पर मीडिया में उस पर कोई चर्चा नहीं होती।
मुज़फ्फरनगर में फर्जी विडियो दिखा कर दंगा करने वाले सोम, राणा, बालियान, साध्वी प्राची मीडिया की नज़र में राष्ट्रवादी है। बम ब्लास्ट के आरोपी साध्वी प्रज्ञा, कर्नल परोहित, स्वामी असीमानंद और संघ से जुड़े कितने ही लोग जो प्रधानमंत्री मोदी, ग्रहमंत्री राजनाथ जैसे बड़े नेताओं के करीबी है उनको मीडिया का समर्थन क्यों है।
शाहबुद्दीन के मामले को इतना जोरशोर से उठा कर ये भगवा मीडिया हरियाणा के इतने बड़े कांड को छुपा गया।
आज देश में सरकार की कोई भी नीति का विरोध करना देशद्रोह बन गया है और यह सब इसी संघी मीडिया की वजह से है। जो वही खबर दिखाता है जो नागपुर के इसके आकाओ की तरफ से कही जाती है।
आज देश की हालत ऐसी हो गई है कि जिस पे जुल्म होता है उसी को मीडिया अपराधी बना कर दिखाता है। चाहे दादरी के अख़लाक़ के परिवार के साथ मीडिया का बर्ताव हो या हरियाणा के मज़लूम परिवार के साथ या मुज़फ्फरनगर के दंगा पीड़ित लोगों के साथ इन सारे मामलों में मीडिया ने पीड़ित मुस्लिमो को ही गुनाहगार साबित करने की कोशिश की।
आतंकवाद के नाम पे फ़र्ज़ी मुकदमो में जब मुस्लिम लड़को को संघी खुफिया एजेंसी गिरफ्तार करती है तब यह न्यूज़ चैनल 24 घंटे झूठी कहानियां दिखा कर गिरफ्तार लोगों के परिवारों और पूरी मुस्लिम क़ौम पर आतंकवादी होने का ठप्पा लगाती है और जब इन्ही बेक़सूर लोगो के कई साल बर्बाद करके उन्हें जब बरी किया जाता है तब मीडिया में उस पर कोई चर्चा नहीं होती।
मीडिया का काम होता है किसी भी खबर को लोगो तक पहुचाना लेकिन देश के ज़्यादातर मीडिया घराने किसी ना किसी बड़े उधोगपतियों के है जो सरकार और संघ के इशारों पे समाज में नफरत फैला कर संघ के नफरत के एजेंडे को पूरा कर रहे है। जिससे देश में हिन्दु-मुस्लिम के बीच में दूरी बढ़ती रहे और 2014 के चुनाव की तरह 2019 में भी इनकी सरकार बने। मोदी ने देश से जो वादे किए थे वो तो भुला दिए है और महंगाई को भी नहीं रोक पाए है अब सिर्फ समाज में नफरत फैला कर ही चुनाव जीता जा सकता है जिसको यह दलाल और भांड मीडिया के माध्यम से अंजाम दे रहे है।
नोट:- मेरी पोस्ट शाहबुद्दीन या किसी और के सपोर्ट में नहीं है बल्कि मीडिया का असली चेहरा लोगो के सामने लाने की कोशिश है।जो मुस्लिमो का नाम आते ही भूखे भेड़िया की तरह उन पर टूट पड़ता है।بزم اردو فاروق ایوب